उत्तर प्रदेश

इटावा में हजारों वकीलों का हल्लाबोल! कचहरी ठप, सड़क जाम कर DM कार्यालय पहुंचे अधिवक्ता, जानिए क्या है पूरा मामला

इटावा में हजारों वकीलों ने हाईकोर्ट में कथित अपमान और कालपी बार अध्यक्ष की हत्या के विरोध में कचहरी ठप कर सड़क जाम किया।

Etawah News: इटावा में बुधवार को अधिवक्ताओं का गुस्सा सड़कों पर दिखाई दिया। इलाहाबाद हाईकोर्ट में अधिवक्ताओं के साथ कथित अपमानजनक व्यवहार और जालौन के कालपी बार एसोसिएशन के अध्यक्ष गयादीन अहिरवार की हत्या के विरोध में हजारों वकीलों ने प्रदर्शन किया। जिला बार एसोसिएशन और सिविल बार एसोसिएशन के नेतृत्व में अधिवक्ताओं ने न्यायिक कार्यों का बहिष्कार करते हुए कलमबंद हड़ताल की। प्रदर्शन के दौरान कचहरी परिसर से लेकर जिला प्रशासन के कार्यालय तक विरोध देखने को मिला।

कचहरी से कलेक्ट्रेट तक निकाला विरोध मार्च

डिस्ट्रिक्ट बार एसोसिएशन के अध्यक्ष राजेश कुमार त्रिपाठी और सिविल बार एसोसिएशन के अध्यक्ष संजय दुबे उर्फ पप्पन की अगुवाई में बड़ी संख्या में अधिवक्ता एकजुट हुए। सबसे पहले वकीलों ने कचहरी परिसर में कामकाज बंद कराया। इसके बाद कलेक्ट्रेट से होते हुए सत्र न्यायालय पहुंचे और वहां भी न्यायिक कार्यों का विरोध किया। प्रदर्शन कर रहे अधिवक्ता कचहरी रोड पर बैठ गए, जिससे कुछ समय के लिए यातायात प्रभावित हुआ। इसके बाद सभी जिलााधिकारी कार्यालय पहुंचे और सिटी मजिस्ट्रेट को अपनी मांगों से संबंधित ज्ञापन सौंपा।

हाईकोर्ट में व्यवहार और कालपी बार अध्यक्ष की हत्या पर नाराजगी

जिला बार एसोसिएशन के अध्यक्ष राजेश कुमार त्रिपाठी ने कहा कि इलाहाबाद हाईकोर्ट में अधिवक्ताओं के साथ हुए कथित अपमानजनक व्यवहार से वकील समुदाय आहत है। उन्होंने चेतावनी दी कि ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति होने पर आंदोलन और तेज किया जाएगा। वकीलों ने दिल्ली पुलिस के एक एसीपी पर अधिवक्ताओं को गोली मारने की धमकी देने का आरोप लगाते हुए उनकी बर्खास्तगी की मांग की।

इसके साथ ही जालौन जिले की कालपी बार एसोसिएशन के अध्यक्ष गयादीन अहिरवार की हत्या के मामले में सभी आरोपियों की गिरफ्तारी और उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग उठाई। अधिवक्ताओं ने पीड़ित परिवार को एक करोड़ रुपये का मुआवजा देने की मांग भी रखी।

मांगें पूरी होने तक आंदोलन जारी रखने की चेतावनी

प्रदर्शन में वरिष्ठ अधिवक्ताओं, बार एसोसिएशन के पदाधिकारियों और बड़ी संख्या में वकीलों ने हिस्सा लिया। अधिवक्ताओं ने स्पष्ट किया कि उनके सम्मान, सुरक्षा और अधिकारों से जुड़े मुद्दों पर प्रशासन को गंभीरता से कदम उठाने चाहिए। अब सभी की निगाहें प्रशासन और संबंधित अधिकारियों की कार्रवाई पर टिकी हैं।

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